आज की दुर्गा
'आज की दुर्गा' पर एक speech....
आदरणीय प्रधानाचार्य/प्रधानाचार्या जी, सभी शिक्षक गण तथा मित्रों।
आज मैं आपके सामने 'आज की दुर्गा' के विषय पर अपने कुछ विचार रख रही हूँ।
दुर्गा का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने शक्ति और साहस की देवी का चित्र आता है। परंपरागत रूप से, माँ दुर्गा को दुष्टों का नाश करने वाली और सत्य की रक्षा करने वाली माना जाता है। उनके दस हाथ हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में कई जिम्मेदारियाँ होती हैं, और हमें हर चुनौती का डटकर सामना करना चाहिए।
लेकिन माँ दुर्गा का रूप केवल पूजा की मूर्तियों तक सीमित नहीं है। आज की दुर्गा हर उस महिला में है जो अपने जीवन में अपने अधिकार और अपने सपने के लिए लड़ती है। चाहे वह घर की जिम्मेदारी निभाने वाली गृहिणी हो, या ऑफिस में मेहनत करने वाली कोई महिला। डॉक्टर, टीचर, पुलिस, वकील, वैज्ञानिक—हर जगह आज की दुर्गा अपना काम कर रही हैं। इस दुर्गा के भी दस हाथ हैं। किसी हाथ से उसने घर की ज़िम्मेदारियों को सँभाल रखा है तो एक हाथ से वो अपने सपने के लिए मेहनत कर रही है। अपने किसी हाथ से बच्चों की परवरिश में लगी है तो किसी हाथ से घर के बड़े-बुजुर्गों की दवाइयाँ सँभाले हुए है।
आज की दुर्गा सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है। वह हर इंसान है जो अपने अंदर की ताकत पहचानता है और बुराई के खिलाफ खड़ा होता है। इसलिए हमें दुर्गा से प्रेरणा लेकर निडर बनना है, और समाज में बदलाव लाने का प्रयास करना है।
तो साथियों, हम सब में दुर्गा का रूप है। हमें उसे पहचानना है, समाज में महिषासुरों को पहचान कर उनसे समाज को बचाना है और अपने साहस और मेहनत से जीवन में आगे बढ़ना है। यही माँ दुर्गा की असली सीख है।
धन्यवाद।
जय माता दी!
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आपका बहुत-बहुत धन्यवाद....🙏🏻🙏🏻🙏🏻